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साधिका एक निजी हाई स्कूल की छात्रा है। उसका मासूम चेहरा और आकर्षक कद-काठी उसे स्कूल के सभी लड़कों के बीच लोकप्रिय बनाती है, और वह जहाँ भी जाती है, पुरुषों का ध्यान अपनी ओर खींचती है। उफ़...कितना उबाऊ है..." साधिका सोफे पर लेटी हुई धीमी आवाज़ में शिकायत कर रही थी, "मम्मी-पापा कहाँ गए? मुझे बहुत भूख लगी है..." दीवार पर लगी घड़ी में आठ बज चुके थे, और साधिका का सब्र खत्म हो चुका था: "ठीक है, मैं अकेले ही बाहर खाना खाने चली जाऊंगी!" जैसे ही वह जाने वाली थी, अचानक दरवाजे की घंटी बज उठी। "क्या मम्मी-पापा वापस आ गए हैं? उन्हें बहुत देर हो गई है!" साधिका ने दरवाजा खोला तो देखा कि वहां एक अजनबी खड़ा है।"आप कौन हैं……" "माफ़ कीजिए, मैं अपना परिचय देना भूल गया। मैं आपके पिताजी का सहकर्मी हूँ।